चतुर्थ अध्याय : दूतीकर्म प्रकरण
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श्लोक (1)- दशितेगिंताकारां तु प्रविरलदर्शनामपूर्वां च दूत्योपसर्पयेत्।। अर्थ- जो स्त्री पुरुष पर अपने भाव संकेतों को तो प्रकट कर चुकी हो ल...Read More
चतुर्थ अध्याय : दूतीकर्म प्रकरण
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