तृतीय अध्याय : भावपरीक्षा प्रकरण
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श्लोक ( 1)- अभियुञ्ञानो योषीतः प्रवृत्तिं परीक्षेत। तया भावः परीक्षतो भवति अभियोगांश्च प्रतिगृह्वीयात्।। अर्थ- पुरुष जब किसी स्त्री से मिलत...Read More
तृतीय अध्याय : भावपरीक्षा प्रकरण
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