नवम अध्याय - औपरिष्टक प्रकरण (मुख मैथुन)
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श्लोक (1)- द्विविधा तृतीया प्रकृतिः स्त्रीरूपिणी पुरुषरूपिणो च।। अर्थ : अब तक आपको चारों प्रकार की स्त्रियों के बारे में आलिंगन से लेकर विप...Read More
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