प्रथम अध्याय : रताववंस्थापन प्रकरण
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श्लोक-1. शशो वृषोऽश्वइति लिंगतो नायकविशेषः। नायिका पुनमृगी वडवा हस्तिनी चेति। अर्थ- छोटे, बड़े या मध्यम आकार के लिंग के आधार पर पुरुष को शश...Read More
प्रथम अध्याय : रताववंस्थापन प्रकरण
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