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Results for 2. साम्प्रयोगिक

दशम अध्याय : रतारम्भावसानिक प्रकरण

Admin 12:22 PM
श्लोक (1)- नागरकः सहमित्रजनेन परिजारकैक्ष कृतपुष्पोपहारे संचारितसुरभिधूपे रत्यावासे प्रसाधिते वासगृह कृतस्त्रानप्रसाधनां युक्तयापीतां स्त्रि...Read More
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नवम अध्याय - औपरिष्टक प्रकरण (मुख मैथुन)

Admin 11:55 AM
श्लोक (1)- द्विविधा तृतीया प्रकृतिः स्त्रीरूपिणी पुरुषरूपिणो च।। अर्थ :  अब तक आपको चारों प्रकार की स्त्रियों के बारे में आलिंगन से लेकर विप...Read More
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अष्टम अध्याय-पुरुषायित प्रकरण (विपरीत रति)

Admin 11:25 AM
श्लोक-(1)- नायकस्य संतताभ्यासात्परिश्रममुपलभ्य रागस्य चानुपशमम्, अनुमता तेन तमधोऽवपात्य पुरुषायितेन साहाय्यं दद्यात्।। अर्थ :  संभोग क्रिया ...Read More
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सप्तम अध्याय : प्रहणनीसीत्कार प्रकरण

Admin 11:01 AM
श्लोक (1)- कलहरूपं सुरतामाचक्षते। विवादात्मकत्वाद्वा मशीलत्वाच्च कामस्थ।। अर्थ :  इसके अन्तर्गत संभोग क्रिया करते समय प्यार को बढ़ाने वाले स...Read More
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षष्ठम अध्याय-संवेशन प्रकरण : संभोग क्रिया आसन

Admin 10:31 AM
श्लोक (1)- रागकाले विशाल यन्स्येव जघनं मृगी संविशेदुच्चरेत।। अर्थ :  इसमें संभोग क्रिया करने के अलग-अलग तरीकों को बताया जाएगा। श्लोक (2)- अव...Read More
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पंचम अध्याय : दशन छेद्यविधि प्रकरण

Admin 9:57 AM
श्लोक(1)- उत्तरौष्ठमन्तर्मुखं नयनमिति मुत्तवा चुम्बनवद्दशनरदन स्थानानि।। अर्थ :  ऊपर वाला होंठ, आंख और जीभ को छोड़कर बाकी सभी वह अंग जिनमें ...Read More
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चतुर्थ अध्याय : नखरदन जातिप्रकरण

Admin 9:33 AM
श्लोक (1)- रागवृद्धौ संघर्षात्मकं नखविलेखनम्।। नखच्छेद अर्थ :  उत्तेजना के अधिक बढ़ जाने पर स्त्री और पुरुष एक-दूसरे के शरीर पर नाखूनों को ग...Read More
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तृतीय अध्याय : चुम्बन विकल्प प्रकरण

Admin 8:54 AM
श्लोक(1)- चुम्बननखदशनच्देद्यानां न पौर्वापर्यमस्ति। रागयोगात् प्राक्संयोगादेषां प्राषान्येन प्रयोगः। प्रहणनसीत्कृतयोश्च संप्रयोगे। अर्थ :  न...Read More
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