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Results for 3. कन्यासम्प्रयुक्तक

पंचम अध्याय - विवाह योग प्रकरण

Admin 8:35 AM
श्लोक-1. प्राचुर्येण कन्याया विविक्तदर्शनस्यालाभे धात्रेयिकां प्रियहिताभ्यामुपगृह्योपसर्पेत्।।1।। अर्थ -  यदि कोई लड़का किसी लड़की से प्यार ...Read More
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चतुर्थ अध्याय - एक पुरुषाभियोग प्रकरण

Admin 8:11 AM
श्लोक-1. दर्शितेग्ङिताकारां कन्यामुपायोऽमियुञ्जीत।।1।। अर्थ -  प्रेमी अपने प्यार की बाते अपनी प्रेमिका से करता है और जब प्रेमिका उसके प्यार ...Read More
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तृतीय अध्याय - बालोपक्रमाः प्रकरण

Admin 11:57 PM
श्लोक-1. वरणसंविधानपूर्वकमधिगतायां विस्त्रम्भणमुक्तम्।।1।। अर्थ :  या तु व्रियमाण न लभ्यते तत्र गान्ध्रर्वादयश्वत्वारो विवाहाः। कामसूत्र में...Read More
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द्वितीय अध्याय - कन्याविस्त्राम्भण प्रकरण

Admin 11:26 PM
श्लोक-1. संगतयोस्त्रिरात्रमध शय्या ब्रह्मचर्य क्षारलवण र्जमाहारस्तथा सप्ताहं सतूर्यमंगलस्त्रानं प्रसाधनं सहभोजनं च प्रेक्षा संबंधिनां च पूजन...Read More
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प्रथम अध्याय - वरण संविधान प्रकारण

Admin 10:47 PM
श्लोक-1. सवर्णायामनन्यपूर्वायां शास्त्रतोऽधिगतायां धर्मोऽर्थः पुत्राः संबंधः पक्षवृद्धिरनुपस्कृता रतिश्च।।1।। अर्थ :  कन्या की शादी का विधान...Read More
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