द्वितीय अध्याय (सपत्नी पुजेष्ठा वृत्तम् प्रकरण)
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श्लोक-1. जाडय्दौः शील्यदौर्भाग्येभ्यः प्रजानुत्पत्तेराभीक्ष्ण्येन दारिकोत्पत्तेर्नायकचापलाद्वा सपत्न्यधिवेदनम्।।1।। अर्थ- बेवकूफी, चरित्रही...Read More
द्वितीय अध्याय (सपत्नी पुजेष्ठा वृत्तम् प्रकरण)
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