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Results for 5. पारदारिक

षष्ठम अध्याय : अन्तः पुरिका वृत प्रकरण

Admin 11:12 AM
श्लोक (1)- नान्तः पुराणां रक्षणयोगात्पुरुषसंदर्शन विद्यते पत्युश्चैकत्वादनेक-कसाधारमत्वाच्चातृप्तिः। तस्मात्तानि प्रयोगत एव परस्परं रञ्ञयेयु...Read More
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पंचम अध्याय : ईश्वरकामितम प्रकरण

Admin 11:04 AM
श्लोक (1)- न राज्ञां महामात्राणां वा परभवनप्रवेशो विद्यते। महाजनेन हि चरितमेषां दृश्येतऽनुविर्धग्यते च।। अर्थ - राजा, मंत्री और विद्वान लोग ...Read More
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चतुर्थ अध्याय : दूतीकर्म प्रकरण

Admin 10:58 AM
श्लोक (1)- दशितेगिंताकारां तु प्रविरलदर्शनामपूर्वां च दूत्योपसर्पयेत्।। अर्थ- जो स्त्री पुरुष पर अपने भाव संकेतों को तो प्रकट कर चुकी हो  ल...Read More
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तृतीय अध्याय : भावपरीक्षा प्रकरण

Admin 10:48 AM
श्लोक ( 1)- अभियुञ्ञानो योषीतः प्रवृत्तिं परीक्षेत। तया भावः परीक्षतो भवति अभियोगांश्च प्रतिगृह्वीयात्।। अर्थ- पुरुष जब किसी स्त्री से मिलत...Read More
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द्वितीय अध्याय : परिचयकारण प्रकरण

Admin 10:44 AM
श्लोक (1)- यथा कन्या स्वयमभियोगसाध्या न तथा दूत्या। परस्त्रियस्तु सूक्ष्मभावा दूतीसाध्या न तथात्मनेतयाचार्याः। अर्थ- कामशास्त्र के पुराने आ...Read More
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प्रथम अध्याय : स्त्री-पुरुष शीलावस्थापन प्रकरण

Admin 10:37 AM
श्लोक ( 1)- तेषु साध्यत्वमनत्ययं गम्यत्वमायतिं वृत्ति चादित एवं परीक्षेत।। अर्थ- पराई स्त्री के साथ संभोग करने की इच्छा रखने से पहले यह सोच...Read More
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