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तोता का काजू-कतरी प्रेम
तोता का काजू-कतरी प्रेम
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तोता का काजू-कतरी प्रेम
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प्रथम अध्याय : सहायगम्यागम्यगमन कारणचिन्ता प्रकरण
श्लोक-1. वेश्यानां पुरुषाधिगमे रतिर्वृत्तिश्च सर्गात्।।1।। अर्थः वेश्याओं में धन के प्रति आकर्षण तथा संभोग की प्रकृति जन्मजात होती है। श्लो...
द्वितीय अध्याय (सपत्नी पुजेष्ठा वृत्तम् प्रकरण)
श्लोक-1. जाडय्दौः शील्यदौर्भाग्येभ्यः प्रजानुत्पत्तेराभीक्ष्ण्येन दारिकोत्पत्तेर्नायकचापलाद्वा सपत्न्यधिवेदनम्।।1।। अर्थ- बेवकूफी, चरित्रही...
कामसूत्र एक परिचय
कामसूत्र को पढ़ने से ज्ञात होता है कि प्राचीन काल में भारत के नागरिक विद्या तथा कला का उपयोग बखूबी करते थे उनकी दिनचर्या से प्रकट होता है | ...
प्रथम अध्याय : रताववंस्थापन प्रकरण
श्लोक-1. शशो वृषोऽश्वइति लिंगतो नायकविशेषः। नायिका पुनमृगी वडवा हस्तिनी चेति। अर्थ- छोटे, बड़े या मध्यम आकार के लिंग के आधार पर पुरुष को शश...
द्वितीय अध्याय : कान्तानुवुत प्रकरण
श्लोक-1. संयुक्ता नायकेन तद्रञ्जनार्थमेकचारिणीवृत्तमनुतिष्ठेत्।।1।। अर्थः वेश्या जब भी किसी पुरुष के साथ सेक्स संबंध बनाये तो वेश्या को उसी...
तृतीय अध्याय : चुम्बन विकल्प प्रकरण
श्लोक(1)- चुम्बननखदशनच्देद्यानां न पौर्वापर्यमस्ति। रागयोगात् प्राक्संयोगादेषां प्राषान्येन प्रयोगः। प्रहणनसीत्कृतयोश्च संप्रयोगे। अर्थ : न...
द्वितीय अध्याय (नष्टरागप्रत्यानयन प्रकरण)
श्लोक-1. चण्डवेगां रञ्जयितुमशक्नुवन्योगानाचरेत्।।1।। अर्थ- प्रचंड वेग वाली स्त्री को अनुरक्त तथा खुश करने में असमर्थ पुरुषों की योगों (औषधि...
अष्टम अध्याय-पुरुषायित प्रकरण (विपरीत रति)
श्लोक-(1)- नायकस्य संतताभ्यासात्परिश्रममुपलभ्य रागस्य चानुपशमम्, अनुमता तेन तमधोऽवपात्य पुरुषायितेन साहाय्यं दद्यात्।। अर्थ : संभोग क्रिया ...
षष्ठम अध्याय : अन्तः पुरिका वृत प्रकरण
श्लोक (1)- नान्तः पुराणां रक्षणयोगात्पुरुषसंदर्शन विद्यते पत्युश्चैकत्वादनेक-कसाधारमत्वाच्चातृप्तिः। तस्मात्तानि प्रयोगत एव परस्परं रञ्ञयेयु...
प्रथम अध्याय - शुभंगकरण प्रकरण
श्लोक-1. व्याख्यातं च कामसूत्रम्।।1।। अर्थ- कामसूत्र के बारे में की गयी व्याख्या अब समाप्त होती है। श्लोक- 2. तत्रोक्तस्तु विधिभिरमिप्रेतमर...
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षष्ठम अध्याय-संवेशन प्रकरण : संभोग क्रिया आसन
श्लोक (1)- रागकाले विशाल यन्स्येव जघनं मृगी संविशेदुच्चरेत।। अर्थ : इसमें संभोग क्रिया करने के अलग-अलग तरीकों को बताया जाएगा। श्लोक (2)- अव...
पंचम अध्याय : दशन छेद्यविधि प्रकरण
श्लोक(1)- उत्तरौष्ठमन्तर्मुखं नयनमिति मुत्तवा चुम्बनवद्दशनरदन स्थानानि।। अर्थ : ऊपर वाला होंठ, आंख और जीभ को छोड़कर बाकी सभी वह अंग जिनमें ...
सप्तम अध्याय : प्रहणनीसीत्कार प्रकरण
श्लोक (1)- कलहरूपं सुरतामाचक्षते। विवादात्मकत्वाद्वा मशीलत्वाच्च कामस्थ।। अर्थ : इसके अन्तर्गत संभोग क्रिया करते समय प्यार को बढ़ाने वाले स...
औरत की योनि में वीर्य के निष्कासन के बाद वीर्य का क्या होता है? जानिए ऐसे ही अन्य प्रश्नों के उत्तर
loading... यौन एक ऐसा विषय है जिस पर व्यक्ति आमतौर पर चर्चा करने में संकोच करता है | बहुत से ऐसे प्रश्न हैं जिन्हें जानने की उत्स...
क्या सेक्स लाइफ़ किसी ख़ास चीज़ को खाने से बेहतर हो सकती है?
अगर इस बात के सबूत मिल जाएं कि कोई खाना आपकी कामेच्छा, मर्दाना ताक़त या यौन सुख को बढ़ा सकता है तो शायद इसे हाथों-हाथ ख़रीद लिया जाएगा. ...
औरत अगर मर्द से ज़बरदस्ती करे तो क्या यह रेप है?
जब एक पुरुष किसी महिला के साथ बिना उसकी मर्ज़ी के ज़बरदस्ती सेक्स करता है तो यह रेप है, लेकिन अगर एक महिला पुरुष को बिना उसकी मर्ज़ी ...
प्रथम अध्याय : रताववंस्थापन प्रकरण
श्लोक-1. शशो वृषोऽश्वइति लिंगतो नायकविशेषः। नायिका पुनमृगी वडवा हस्तिनी चेति। अर्थ- छोटे, बड़े या मध्यम आकार के लिंग के आधार पर पुरुष को शश...
2. विद्या समुदेश प्रकरण
श्लोक-1. धर्मार्थाग्ङविद्याकालाननुपरोधयन् का्मसूत्रं तदग्ङविद्याश्च पुरुपोऽधीयीत 1।। अर्थ- अर्थशास्त्र, धर्मशास्त्र और इनके अंगभूत शास्त्रो...
कामसूत्र एक परिचय
कामसूत्र को पढ़ने से ज्ञात होता है कि प्राचीन काल में भारत के नागरिक विद्या तथा कला का उपयोग बखूबी करते थे उनकी दिनचर्या से प्रकट होता है | ...
अष्टम अध्याय-पुरुषायित प्रकरण (विपरीत रति)
श्लोक-(1)- नायकस्य संतताभ्यासात्परिश्रममुपलभ्य रागस्य चानुपशमम्, अनुमता तेन तमधोऽवपात्य पुरुषायितेन साहाय्यं दद्यात्।। अर्थ : संभोग क्रिया ...
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