loading...

इन औषधियों से बढ़ाएं कई गुना कामशक्ति !

शतावरी :

प्रातः एवं रात्रि को शतावरी की जड़ का चूर्ण लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा गर्म दूध के साथ लेने से शरीर में बल और वीर्य को बढ़ता है। इसे दूध में चाय की तरह उबालकर भी सेवन किया जा सकता है। यह औषधि स्त्रियों के स्तनों को बढ़ाने में लाभकारी रहती है। प्रातः खाली पेट 10 ग्राम शतावरी के ताजे रस लेने से कुछ ही समय में वीर्य बढ़ जाता है।

उड़द :

उड़द के लड्डू, उड़द की दाल, दूध में बनाई हुई उड़द की खीर का सेवन करने से वीर्य एवं संभोग शक्ति बढ़ती है।

तालमखाना :

प्रतिदिन प्रातः-सायं  लगभग 3-3 ग्राम तालमखाना के बीज दूध के साथ लेने से वीर्य का पतलापन, शीघ्रपतन, स्वप्नदोष एवं शुक्राणुओं की कमी दूर होती है। इससे वीर्य गाढ़ा हो जाता है।
loading...

कौंच के बीज :

  • संभोग शक्ति बढ़ाने के लिए कौंच के बीज बहुत लाभकारी रहते हैं। इसके बीजों का सेवन करने से वीर्य की बढ़ोत्तरी होती है, संभोग करने की इच्छा तेज होती है और शीघ्रपतन रोग में लाभ होता है। इसके बीजों का उपयोग करने के लिए बीजों को दूध या पानी में उबालकर उनके ऊपर का छिलका हटा देना चाहिए तत्पश्चात बीजों को सुखाकर बारीक चूर्ण बना लेना चाहिए। इस चूर्ण को लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम मिश्री के साथ दूध में मिलाकर सेवन करने से लिंग का ढीलापन और शीघ्रपतन का रोग दूर होता है।
  • कौंच के बीज + सफेद मूसली + अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण तैयार कर लें। इस चूर्ण में से एक चम्मच चूर्ण प्रातः-सायं  दूध के साथ लेने से लिंग का ढीलापन, शीघ्रपतन और वीर्य की कमी होना जैसे रोग जल्दी दूर हो जाते हैं।

गोखरू :

नपुंसकता रोग में गोखरू के बीजों के 10 ग्राम चूर्ण में 10 ग्राम  काले तिल मिलाकर 250 ग्राम दूध में डालकर आग पर पका लें। पकने पर इसके खीर की तरह गाढ़ा हो जाने पर इसमें 25 ग्राम मिश्री का चूर्ण मिलाकर सेवन करना चाहिए। इसका सेवन नियमित रूप से करने से नपुसंकता रोग में बहुत ही लाभ होता है।

मूसली :

  • प्रतिदिन प्रातः-सायं सफ़ेद मूसली के चूर्ण को लगभग 3-3 ग्राम की मात्रा दूध के साथ लेने से शरीर में वीर्य एवं काम-उत्तेजना की वृद्धि होती है।
  • मूसली के लगभग 10 ग्राम चूर्ण को 250 ग्राम गाय के दूध में मिलाकर अच्छी तरह से उबालकर किसी मिट्टी के बर्तन में रख दें। इस दूध में रोजाना सुबह और शाम पिसी हुई मिश्री मिलाकर सेवन करने से लिंग का ढीलापन, शीघ्रपतन और संभोग क्रिया की इच्छा न करना, वीर्य की कमी होना आदि रोगों में अत्यंत लाभ मिलता है।

सेमल :

लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में सेमल की जड़ के चूर्ण और मूसली के चूर्ण को रोजाना सुबह और शाम मीठे दूध के साथ सेवन करने से वीर्य की बढ़ोत्तरी होकर संभोग करने की शक्ति तेज होती है। स्वप्नदोष और शीघ्रपतन रोग से ग्रस्त रोगियों को सेमल की गोंद में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर लगभग 6-6 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम दूध और पानी के साथ सेवन करना चाहिए।

अश्वगंधा :

अश्वगंधा का सेवन करने से शरीर में घोड़े की तरह संभोग करने की शक्ति आ जाती है और इसके पौधे के अंदर से घोड़े की तरह गंध आती है इसलिए इसका नाम अश्वगंधा पड़ा है।
अश्वगंधा की जड़ के 3-3 ग्राम चूर्ण को दूध के साथ सेवन करने से शारीरिक शक्ति और संभोग करने की शक्ति तेज होती है। वीर्य की कमी होना, धातु की कमजोरी, उत्तेजना की कमी होना, मानसिक कमजोरी आदि रोगों में अश्वगंधा का सेवन करना लाभकारी होता है। जब संभोग इच्छा की कमी एवं लिंग की उत्तेजना में कमी होने पर अश्वगंधा के चूर्ण को गाय के घी में मिलाकर चाटने और उसके ऊपर से गाय का गर्म-गर्म दूध पीना लाभकारी रहता है।

दूध :

आयुर्वेद के अनुसार दूध को सबसे ज्यादा उपयोगी वाजीकरण औषधि का नाम दिया गया है। दूध वीर्य की वृद्धि करने वाला, काम-शक्ति को बढ़ाने वाला और शरीर की खोई हुई ताकत को दुबारा पैदा करने में प्रभावशाली होता है। यदि स्त्री के साथ संभोग करने से पहले गर्म दूध पी लिया जाए तो इससे यौनशक्ति बढ़ती है |संभोग करने के पहले और बाद में दूध पीना अत्यंत लाभकारी होता है।

loading...
इन औषधियों से बढ़ाएं कई गुना कामशक्ति ! इन औषधियों से बढ़ाएं कई गुना कामशक्ति ! Reviewed by Only my health site on 8:49 AM Rating: 5

Most Popular

loading...
News24. Powered by Blogger.